अनुकूल–प्रतिकूल परिस्थितियों में समभाव ही रामत्व : आचार्य शांतनु महाराज

आजमगढ़ शहर

आजमगढ़। एस के पी इंटर कॉलेज प्रांगण में आयोजित श्रीरामकथा के छठे दिन कथा का प्रवाह अत्यंत भावपूर्ण और विचारोत्तेजक रहा। कथा व्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने “सोई सुत बड़भागी” चौपाई के माध्यम से प्रभु श्रीराम के समत्व, संयम और जीवन-दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जो अनुकूलता और प्रतिकूलता, दोनों में समान रहता है, वही राम है। जो दुखद परिस्थितियों को भी सुखद बना दे, वही रामत्व का साक्षात् स्वरूप है।आचार्य ने वनगमन के प्रसंग में प्रभु श्रीराम द्वारा देखी गई चार अनुकूलताओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम वन जाने में भी कल्याण देखते हैं।पहली मां कैकेयी की इच्छा पूर्ण होगी, दूसरी पिता दशरथ का वचन निभेगा, तीसरी, भरत राजा बनेंगे, और चौथी, उन संतों का दर्शन होगा जिनके दर्शन सामान्य जीवन में दुर्लभ हैं।यह दृष्टि ही राम को सामान्य मनुष्य से ऊपर उठाती है।मातृ-चरित्र की महत्ता पर बोलते हुए आचार्य शांतनु जी महाराज ने कहा कि रघुवंश की माताओं को समझना हो तो मां कौशल्या को देखिए। कौशल्या जी कहती हैं कि यदि केवल पिता की आज्ञा होती तो वे राम को रोक लेतीं, किंतु वनवास की आज्ञा माता कैकेयी ने दी है, इसलिए माता–पिता दोनों की आज्ञा का पालन करना ही धर्म है। “वन को जाओ और बन कर लौटो” यह कथन जीवन को संस्कारित करने की प्रेरणा देता है।छठे दिन की कथा के यजमान के रूप में रित्विक जायसवाल एवं अमृता जायसवाल, अंकित अग्रवाल एवं प्रिया अग्रवाल, पंकज अग्रवाल एवं डिम्पल अग्रवाल, चंदन सिंह एवं अनु सिंह उपस्थित रहे। पूरे पंडाल में भक्ति, शांति और आत्मचिंतन का वातावरण व्याप्त रहा। श्रोता कथा-रस में डूबे रहे और प्रभु श्रीराम के चरित्र से जीवन को सम, संयमित और संतुलित बनाने की प्रेरणा लेकर लौटे।इस अवसर पर आरएसएस प्रान्त सह ग्राम विकास प्रमुख सत्येंद्र जी, विभाग सह संघचालक राजेंद्र, जिला संघचालक कामेश्वर, पंकज कुमार सिंह, कथा व्यास अलंकार कौशिक, संतोष गुप्ता, राम कुमार, सूर्यनाथ सिंह, कुंवर गजेंद्र सिंह, मनोज विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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